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  कानपुर के सेंडल मामले में उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ की सरकार ने बड़ा फैसला किया है प्रदेश सरकार ने कानपुर के प्रोबेशन ऑफीसर अजीत कुमार और राजकीय बाल संरक्षण गृह के अध्यक्ष कमलेश पाल को निलंबित कर दिया है दोनों कर्मचारियों को लापरवाही बरतने का आरोप लगाया और और टाइम उसी समय उन को निलंबित कर दिया गया है

 कानपुर के इस बाल गिरी घटना को लड़कियों के संरक्षण में बहुत ही बेहतरीन पूर्ण बताया गया है तथा इस घटना ने बाल संरक्षण गृह की जो छवि है उसको धूमिल करने का आरोप इन दोनों कर्मचारियों के ऊपर लगा है
 इसके अलावा योगी सरकार ने राज्य बाल संरक्षण गिरी कानपुर की सहायक टीचर को मिथलेश पाल को मिनिमम कर दिया गया है और उन्होंने कहा है कि कोविड-19 के संबंध में जारी नियमों को इन्होंने पालन नहीं कर पाया बहुत लफड़ा हुआ था 

जिससे इनके लोगों के बीच फैल गया है गर्भवती अस्पताल में भर्ती थी तब चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गया था जिन्होंने पूरी तरीके से अनदेखी किया हमको काम जारी रखने का आदेश दे दिया जिसकी वजह से उनकी लोगों को भी लोग निलंबित किया गया है 
सरकार के द्वारा जारी किए गए आधे से बताया गया कि बाल संरक्षण गृह के लड़कियों को सोशल मीडिया में कहा गया है कि एचआईवी संक्रमित याला कि अपने मित्र एस्फाल्ट उच्च अधिकारियों को इसके बारे में कोई सही जानकारी नहीं दिया तथा इसका खंडन प्रश्न तमाम आरोपों को देखते हुए सरकार ने सहायक अध्यक्षता को निलंबित कर दिया गया है 

तत्काल में से एक से लेने का प्लान बनाया गया है इन लड़कियों में पाई गई थी आने से पहले थे योगी सरकार ने लेने का आदेश दिया है तथा इसके लिए एक टीम गठित किया है जिससे इनके कारनामों का पर्दाफाश तथा इनके द्वारा किए गए लापरवाही ना करें इसके लिए एक अलग टीम की व्यवस्था की गई है तथा इनके को कभी माफ नहीं किया जाएगा इस तरीके का बयान योगी सरकार ने दिया है

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